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सोमवार, 8 सितंबर 2014

नेताओं का कैंपस सलेक्शन

विश्वत सेन
‘कादिर मियां! यह भारत है. इक्कीसवीं सदी का भारत. दुनिया की नजरों में आज का भारत सिर्फ एक मंडी भर है. यहां पूरे संसाद के कारोबारी सूई से लेकर हवाई जहाज तक बेचने आते हैं. इसीलिए आप देखते हैं कि किसी वस्तु का अनुसंधान अमेरिका में होता है, निर्माण यूरोपीय देश करते हैं और बिक्री के लिए सबसे पहले उसकी लॉन्चिंग भारत में की जाती है. उदारवादी अर्थव्यवस्था में हमारा देश सिर्फ और सिर्फ एक बड़ा बाजार है, क्योंकि यहां के दिखावापसंद लोगों के पास क्रयशक्ति अधिक है. गरीब से गरीब आदमी भूखा मरता रहेगा, फिर भी दो आने का जुगाड़ होते ही वह सीधा बाजार की ओर भागता है. यह हम ही नहीं, अंगरेज भी कहा करते थे.’ भूपाल बाबू पार्टी के दफ्तर में कार्यकताओं की मीटिंग में प्रदेश प्रमुख को ‘क्रांति के डॉ डैंग’ की तरह संबोधित कर रहे थे. वे रुके नहीं, अपने ही रौ में बोल रहे थे-‘आज जब हम इक्कीसवीं सदी के भारत की बात करते हैं, तो हमारे पास आउटसोर्सिग और कैंपस सलेक्शन के अलावा बचा ही क्या है? हम वैज्ञानिक, आइआइटियन, इंजीनियर, डॉक्टर, डाटा एंट्री ऑपरेटर, कंप्यूटर ऑपरेटर, छात्र, शिक्षक, नेता, अभिनेता, चोरद्व डाकू, पत्रकार, पैंतराकार, झाड़-पोंछा लगाने वाली दाई, नर्स, अंडरवर्ल्ड डॉन, पंडित, मुल्ला, मुख्तार सबकी आउटसोर्सिग ही तो करते हैं. इन्हें भारत में पाल-पोस कर, पढ़ा-लिखा कर व्यावसायिक कोर्स कराते हैं और मल्टीनेशनल कंपनियों के माध्यम से मोटे सालाना पैकेज पर कैंपस सलेक्शन करके झट बाहर भेज देते हैं. हर क्षेत्र में ट्रेनिंग देने के स्कूल और कॉलेज खुले हुए हैं. हमारी राजनीति का भी ट्रेनिंग स्कूल और इंस्टीट्यूट है.’ भूपाल बाबू अब भी टेप रिकॉर्डर की तरह बोले जा रहे थे. बोल रहे थे-‘पहले हमारा विद्यार्थी कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में संचालित छात्र राजनीति संगठनों में दाखिला लेकर ट्रेनिंग लेता था, लेकिन बदले जमाने के अनुसार अब हम भी मल्टीनेशनल कंपनियों की तरह डाइरेक्ट कैंपस सलेक्शन करना शुरू कर दिये हैं. जो लड़का चोर है, झूठा है, फरेबी और धोखेबाज है, चाकू व गोली-बारूद चलाता हो या चलवाता हो, दंगा करता हो या करवाता हो ऐसे लड़कों को हम मोटे दैनिक पैकेज पर कैंपस सलेक्शन करते हैं. वहीं, जो लड़की या महिलाएं पति, सास, मां-बाप, भाई-बंधु, समाज विरोधी हो, बेवजह सीधे-सादे या फिर मनचलों को अपनी जाल में फांसती हो और फिर उस पर कानून का सहारा लेते हुए यौन शोषण का आरोप लगवाती हो, जेल भिजवाती हो, नश्तर चलाती है, नैन मटकाती हो, वह हमारी परीक्षा में फस्र्ट डिविजनर है. उसे भी हम दैनिक मोटे पैकेज पर सलेक्ट करते हैं. हम जानते हैं कि इस तरह के बालक-बालिकाएं, पुरुष महिलाएं अव्वल दज्रे का नेता हो सकते हैं. कादिर मियां, ऐसे लोगों को हम पार्टी में ऊंचे ओहदे पर बिठाने के साथ राजसी ठाट-बाट भी उपलब्ध कराते हैं.’
भूपाल बाबू ने प्रदेश प्रमुख कादिर मियां को आदेशी लहजे में कहा-‘हमने मंगरू की बेटी के बारे में चर्चाएं खूब सुनी है. जाइए उसका कैंपस सलेक्शन करके ले आइए. उसे पार्टी में ऊंचा ओहदा देने के साथ ही राजसी ठाट-बाट भी उपलब्ध करायेंगे. वोट में जीत हासिल करनी है, तो मंगरू की बेटी को युवाओं को लुभाने के लिए सलेक्ट करना जरूरी है.’
आधे घंटे के लेक्चर के बाद भूपाल बाबू के इस आदेश पर कादिर मियां ने ऐतराज जाहिर किया. कहा-‘लेकिन साहब, यदि हम मंगरू की बेटी को सलेक्ट कर लेते हैं, तो नीचे और ऊपर के नेताओं में हड़कंप मच जायेगा. पहले उन दोनों से विचार तो कर लेते. फिर साह-पुरैनी भी नाराज हो जायेंगे.’
कादिर मियां की यह बात मानों भूपाल बाबू को बचकानी लगी. उन्होंने कहा-‘निरा मूर्ख हो. यदि मैंने उसे सलेक्ट करने के लिए कहा, तो समझो सभी शक्तियां मेरे आदेश में ही छिपी हैं. जाओ, मौका मत गंवाओ और मंगरू को सूचना दे दो कि उसकी बेटी का राजनीति में कैंपस सलेक्शन हो गया है. उसे मोटी रकम के साथ पूरे शानो-शौकत से रहने-सहने की व्यवस्था कर दी जायेगी.’
इसी बीच कादिर मियां कार्यकताओं की ओर देख कर बोले-‘क्यों भाइयों, आपलोगों को यह प्रस्ताव मंजूर है?’ उनके यह बात कहते ही मानों रटंतू तोतों ने एक साथ कहा-‘हां जी, हमें पसंद है. हमें हमारा नया नेता मिल जायेगा, इससे अच्छी बात और क्या हो सकती है.’
सितंबर, 08, 2014